दिवाली 2026: तारीख, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और पूरी 5 दिन की गाइड
दिवाली 2026 इस बार रविवार, 8 नवंबर को पड़ रही है — और अच्छी बात यह है कि वीकेंड के साथ जुड़ने से तैयारी करना थोड़ा आसान हो जाएगा। यह कार्तिक अमावस्या की रात होती है, जब मान्यता है कि माँ लक्ष्मी उन्हीं घरों में प्रवेश करती हैं जो साफ-सुथरे और रोशनी से जगमगाते हों। अगर आप चाहते हैं कि लक्ष्मी पूजा किसी अनुभवी पंडित जी द्वारा सही विधि-विधान से हो, न कि मोबाइल पर मंत्र ढूंढते हुए, तो Prayfullit पर पंडित बुक करें और हम आपके शहर के अनुसार पंडित जी की व्यवस्था कर देंगे।
इस लेख में आपको मिलेगा: सटीक मुहूर्त, यह समय ही क्यों चुना जाता है इसकी वजह, धनतेरस से भाई दूज तक का पूरा 5-दिवसीय कैलेंडर, और पूजा के सभी चरण क्रम से।
दिवाली 2026 एक नज़र में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| त्योहार | दिवाली / दीपावली |
| तारीख | रविवार, 8 नवंबर 2026 |
| तिथि | कार्तिक अमावस्या |
| लक्ष्मी पूजा मुहूर्त (दिल्ली) | लगभग शाम 5:47 – 7:13 बजे |
| प्रदोष काल (दिल्ली) | लगभग शाम 5:25 – 8:02 बजे |
| वृषभ (स्थिर) लग्न | प्रदोष काल के भीतर ही आता है — धन-संबंधी पूजा के लिए विशेष शुभ माना जाता है |
| अमावस्या तिथि समाप्त | लगभग रात 9:47 बजे, 8 नवंबर |
शहर के हिसाब से मुहूर्त का समय 15 से 45 मिनट तक आगे-पीछे हो सकता है, क्योंकि यह सूर्यास्त पर निर्भर करता है — कोलकाता में शाम जल्दी ढलती है, इसलिए वहाँ मुहूर्त जल्दी शुरू होता है, मुंबई में सबसे देर से। ऊपर दी गई टाइमिंग दिल्ली के लिए एक संदर्भ है; प्रकाशित करने से पहले अपने शहर का सटीक समय ड्रिक पंचांग से ज़रूर जांच लें।
यह खास समय ही क्यों चुना जाता है?
यह वह हिस्सा है जो ज़्यादातर दिवाली लेखों में छूट जाता है, लेकिन यह जानना ज़रूरी है क्योंकि यही असली सवाल का जवाब देता है — "यही समय क्यों, कोई और नहीं।"
लक्ष्मी पूजा सिर्फ घड़ी देखकर तय नहीं होती — इसके लिए दो चीज़ों का मेल ज़रूरी है। पहला, अमावस्या तिथि का सक्रिय होना। दूसरा, इसका प्रदोष काल से मेल खाना, यानी सूर्यास्त के बाद का लगभग दो घंटे का समय। जहाँ ये दोनों समय आपस में मिलते हैं, वही मुहूर्त कहलाता है। कुछ वर्षों में इस समय के भीतर स्थिर लग्न (आमतौर पर वृषभ या सिंह) भी आ जाता है, जिसे धन-संबंधी पूजा के लिए अतिरिक्त शुभ माना जाता है — क्योंकि "स्थिर" राशियाँ स्थायित्व दर्शाती हैं, यहाँ इसका मतलब है घर में धन का टिके रहना।
लक्ष्मी पूजा की पौराणिक कथा
इस कथा का संबंध समुद्र मंथन से है। मान्यता है कि माँ लक्ष्मी धनतेरस के दिन क्षीर सागर से प्रकट हुई थीं, और दो दिन बाद, दिवाली की रात, उन्होंने भगवान विष्णु को अपना पति चुना। यही कारण है कि साल की किसी और रात के बजाय यह विशेष रात लक्ष्मी जी के आगमन के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है।
दिवाली 2026 का पूरा 5-दिवसीय कैलेंडर
| दिन | तारीख (2026) | त्योहार | महत्व |
|---|---|---|---|
| 1 | 6 नवंबर (शुक्र) | धनतेरस | सोना-चांदी खरीदना, धन्वंतरि पूजा |
| 2 | 7 नवंबर (शनि) | नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) | सुबह उबटन स्नान, नरकासुर वध की याद |
| 3 | 8 नवंबर (रवि) | दिवाली / लक्ष्मी पूजा | मुख्य रात्रि — लक्ष्मी-गणेश पूजन |
| 4 | 9 नवंबर (सोम) | गोवर्धन पूजा | कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाना; अन्नकूट भोग |
| 5 | 10 नवंबर (मंगल) | भाई दूज | भाई-बहन के रिश्ते का पर्व, तिलक |
क्षेत्रीय भिन्नता का भी ध्यान रखें — उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में स्थानीय तिथि के अनुसार छोटी दिवाली और मुख्य लक्ष्मी पूजा एक ही शाम को मनाई जा सकती है, और गोवर्धन पूजा की तारीख कुछ राज्यों में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। प्रकाशित करने से पहले जिस भी शहर के लिए लिख रहे हैं, उसका क्रम ड्रिक पंचांग से जांच लें।
दिवाली पूजा विधि — चरण दर चरण
- घर की सफाई और सजावट सूर्यास्त से पहले पूरी कर लें — मान्यता है कि लक्ष्मी जी सबसे साफ और रोशन घर में सबसे पहले प्रवेश करती हैं, इसलिए यह सिर्फ सफाई नहीं, पूजा का ही एक हिस्सा है।
- पूजा स्थल तैयार करें — लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति साथ में रखें, संभव हो तो एक चांदी या तांबे का सिक्का भी रखें।
- मुख्य दीपक प्रदोष काल शुरू होते ही जलाएं, फिर घर के बाकी हिस्सों और मुख्य द्वार पर दीये जलाएं।
- फूल, मिठाई और अक्षत अर्पित करें दोनों देवताओं को, और नई खरीदारी या दिन की कमाई को पूजा स्थल के पास रखें ताकि वह "आशीर्वादित" हो सके।
- लक्ष्मी आरती करें, उसके बाद गणेश आरती।
- व्यापारियों के लिए: इसी दिन चोपड़ा पूजन भी होता है — नई बहीखातों की पूजा कर नए वित्तीय वर्ष की शुरुआत की जाती है, जो कई व्यापारिक समुदायों में परंपरा है।
- शाम का समापन पटाखों या दीयों से करें, और पड़ोसियों के साथ मिठाई बांटें।
दिवाली 2026 के लिए Prayfullit पर पंडित बुक करें
अगर आप खुद मंत्र, समय और तैयारी संभालना नहीं चाहते, तो Prayfullit आपके लिए व्यवस्था कर सकता है:
- घर पर लक्ष्मी-गणेश पूजा
- दुकान/व्यापार के लिए चोपड़ा पूजन
- धनतेरस से दिवाली तक की संयुक्त पूजा पैकेज
दिवाली पूजा के लिए पंडित बुक करें या हमारी टीम से बात करें — तारीख जितनी नज़दीक आएगी, स्लॉट उतनी जल्दी भरेंगे।
धनतेरस से भाई दूज तक के 8 दिन, और यह सब निर्भर करता है एक शाम पर — 8 नवंबर — जब अमावस्या, प्रदोष काल और (इस साल) स्थिर लग्न, तीनों का मेल होता है। अगर आप चाहते हैं कि यह शाम किसी अनुभवी व्यक्ति की देखरेख में हो, तो Prayfullit पर पंडित बुक करें, या खुद पूजा सामग्री जुटाने के लिए हमारी दिवाली पूजा सामग्री रेंज देखें।